Sunday, 18 March 2012

सपने 2

रात ही तो अपनी होती है,
संभल के ये खर्चनी होती है,
सब रात में सपने देखते हैं,
मैं रात में सपने बुनता हूँ ||


वही सपने जो कभी सोते हुए आते थे,
आज मुझे सोने नहीं देते हैं,
ये सपने नहीं हैं, आधार हैं भविष्य का,
प्रतिरूप है सच का, जो अनभिज्ञ है हमसे,


कहते हैं समय के साथ सपने भी बदल जाते हैं,
पर कुछ सपने कभी नहीं बदलते,
क्योंकि उन्हें बदलना होता है यथार्थ में,
जो संभव नहीं बिना खोये अपना अस्तित्व,


या यूँ कहें कि वो ही पूर्णता है इनकी,
जीवन का अटूट सत्य बनने के लिये,
मार्ग प्रशस्त करते हैं यही सपने,
और यही सत्य भविष्य में नए सपनों को जन्म देता है ||

Thursday, 15 March 2012

समय चक्र

इक रास्ता जा रहा था उस तरफ,
जहां जाने से भी डरते हैं सब,
पर जाना सबको है एक दिन,
क्योंकि सबकी मंजिल वही तो है,
मैंने डर को थोडा बाहर निकाला,
और बढ़ चला उस रास्ते पे अकेले ही,
कहीं राख अभी भी मानो गरम थी,
तो कहीं समय के साथ ठंडी पड़ गयी थी,
एक सन्नाटा-सा छाया हुआ था चारों ओर,
तभी आवाज़ आने लगी दूर कहीं से,
एक झुरमुट आ रहा था कुछ मानवों का,
रुदन का सा माहौल था जैसे,
सब राम और हरि नाम जप रहे थे,
मन्त्रों का उच्चारण हो रहा था,
चार कंधों पे आ रहा था मेरा ही शरीर,
कुछ अपने थे और कुछ अपने से थे,
जो पाया था, यहीं रह गया आज,
रह गया था बस ये आखिरी पल का साथ,
आज ना कोई ख़ुशी थी, ना कोई ग़म,
बस एक ही सोच थी इस विचलित मन में,
कि अगर समझ पाता इस सत्य को पहले ही,
तो कर पाता इस अनमोल जीवन का सदुपयोग,
कितनी छोटी थी जिंदगी के जी भर जी भी ना सका,
धीरे-धीरे सब शांत-सा पड़ने लगा,
सब बढ़ चले अपने-अपने जीवन पथ पर,
फिर उसी जीवन की आपा-थापी में,
और मैं फिर से अकेला हो गया था,
मेरी राख भी अब ठंडी पड़ने लगी थी,
अंत हो गया था आज इस अध्याय का,
और समय था अगले अध्याय के प्रारम्भ का,
यहाँ रुदन था तो कहीं ख़ुशी की बारी थी,
समय के चक्र पे बढ़ चला फिर एक बार ||

Monday, 5 March 2012

याद - 2

हवा में उड़ती वो खुशबू,
याद तुम्हारी लाती है,
प्यार का नशा चढ़ा के,
बेसुध आज भी हमें कर जाती है...