Monday, 27 August 2012

हाल-ए-दिल

तुमसे मिला मैं कुछ इस तरह,
कि अपने होने का गुमान होने लगा,
तुम्हें देखा तो देखता रह गया,
कि सपने सच होने का एहसास होने लगा |

 
वो हंसी आज भी उतनी ही खिली थी,
जब पहली बार मुझ से मिली थी,
आँखों में भी वही आरज़ू थी,
होंठों पे आके बात आज फिर रुकी थी,

तू भी वही, मैं भी वही,
मुझे आज भी तेरा इंतज़ार है यहीं,
ये आँखें आज भी ढूंढ रही हैं,
मेरे उन्हीं सवालों के जवाब कहीं,


इक बार जो हाल-ए-दिल कहा होता,
समां कुछ और ही यहाँ होता,
सांसें थम ही जाती बेशक,
हर पल तो मर-मर के ना कटा होता ||

उडारी

उड़ता रहे इसी जोश से तू,
इस डाल तो कभी उस डाल,
ये दुआ है दोस्तों की,
और ना रहे कोई तमन्ना बाकी,


गिनते-गिनते जाम खत्म हो जाए,
इतना पीना है तुझे साकी,
ठहरना नहीं है मेरे दोस्त,
अभी तो एक और लंबी उड़ान है बाकी…

Monday, 13 August 2012

मेरा अक्स

मेरा अक्स मुझ से मेरी पहचान कराये,
मुझ में ये है, इस में मैं हूँ,
फिर भी ये क्यूँ अनजान रिश्ते बनवाये,
मेरा अक्स मुझ से मेरी पहचान कराये...

इक अनजानी-सी परछाई से ये जुड्वाता है,
इसमें फिर भी मेरा ही सब नज़र आता है,
दूर जाना चाहूँ तो अपने पास ले आये,
मेरा अक्स मुझ से मेरी पहचान कराये...

कहीं मैं छोटा, तो कहीं मैं बड़ा,
कहीं मैं मन ही मन खुद से लड़ा,
इन सब भावों को ये शून्य बनाये,
मेरा अक्स मुझ से मेरी पहचान कराये...

सुख आये तो सब गले लगायें,
दुःख आये तो पास भी ना आयें,
हर क्षण ये ही मेरा साथ निभाये,
मेरा अक्स मुझ से मेरी पहचान कराये...

मैं कौन हूँ, क्या हूँ, नहीं जानता,
दिल दिमाग की और दिमाग दिल की नहीं मानता,
आत्म-मंथन के द्वंद्व से ये मुक्ति दिलाये,
मेरा अक्स मुझ से मेरी पहचान कराये...