एक हवा का झोंका आया
जो सब कुछ उड़ा ले गया
कुछ सपने थे जो कभी अपने ना थे
बह गए उसी लय में
जिनमें जाना था उन्हें
कुछ सपने थे जो अपने ना थे
पर उस अपनेपन का अहसास करा गए
कि भूलकर भी ना भूल पाऊंगा
उन अपनों को और उस हवा के झोंके को||
एक बदली आयी
जो दिल तक बदल गयी
जाते ही जिसके, खुद को पाया
एक बियावान अकेले में
साथियों को ढूँढा पर पाया
एक बदला हुआ स्वरुप
जिससे अनभिज्ञ रहा आज तक
पर धन्यवादी हूँ उस बदली का
जिसने कराया सच्चाई से परिचय||
पानी की बौछार ने धो दिया
उन रिश्तों को जिन्हें अपना कहता रहा
पर अपना बना ना सका
वो एक सपना ही तो था
जो सपने की तरह सपने में ही खो गया
मन को समझा ही लिया
कि सपने सच नहीं होते
बल्कि होते हैं बहने के लिए
उसी बौछार में, जिसे सोचकर भी
सिहरन सी हो उठती है||
हवा, बदली और पानी क्या नहीं बदल सकते,
सोचते-सोचते थक सा गया हूँ|